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बाजार में गिरावट की छाया

मुंबई। तेज स्पीड से चहलकदमी कर रहे बाजार की अचानक चाल धीमी पड़ती गई। बजट ने उसे काफी करारा झटका दिया है। शेयरों से कमाई पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स ने ऐसे मूड खराब किया कि बाजार आज औंधे मुंह गिर पड़ा। आज की गिरावट में निवेशकों के करीब 5 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। सेंसेक्स और निफ्टी 2.25 फीसदी से ज्यादा गिरकर बंद हुए हैं। कारोबार के अंत आज सैंसेक्स 839.91 अंक यानि 2.34 फीसदी गिरकर 35,066.75 पर और निफ्टी 256.30 अंक यानि 2.33 फीसदी गिरकर 10,760.60 पर बंद हुआ।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मारकाट मची। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 4 फीसदी गिरकर 16,575 के स्तर पर बंद हुआ है। निफ्टी का मिडकैप 100 इंडेक्स 4.3 फीसदी लुढ़क कर 19,760.4 के स्तर पर बंद हुआ है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 4.7 फीसदी की कमजोरी के साथ 17,850 के नीचे बंद हुआ है। निफ्टी का स्मॉलकैप इंडेक्स 6 फीसदी टूटकर 8,251 के स्तर पर बंद हुआ।

आईटी सेक्टर को छोड़ सभी सेक्टर इंडेक्स में जोरदार गिरावट देखने को मिली। बैंक निफ्टी 2.8 फीसदी की कमजोरी के साथ 26,451 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी के ऑटो इंडेक्स में 3.4 फीसदी, मीडिया इंडेक्स में 3.5 फीसदी, मेटल इंडेक्स में 3 फीसदी, फार्मा इंडेक्स में 1.25 फीसदी, पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.9 फीसदी और प्राइवेट सेक्टर बैंक इंडेक्स में 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई के कैपिटल गुड्स इंडेक्स में 3.6 फीसदी, कंज्यूमर ड्युरेबल्स इंडेक्स में 3.4 फीसदी, पावर इंडेक्स में 4 फीसदी, रियल्टी इंडेक्स में 6.3 फीसदी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 3 फीसदी की कमजोरी आई है।

इस भारी गिरावट का मुख्य वजह बजट में निवेशकों को लेकर किए गये जेटली के एलान है। दरअसल कल सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगा दिया है। इससे निवेशकों का सेंटीमेट्स बिगड़ा है। इसके तहत एक साल से ज्यादा रखे गए शेयरों पर अगर 1 लाख से ज्यादा इनकम होती है, तो निवेशकों को 10% टैक्स देना होगा। वहीं, बजट में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को हटाने का भी एलान नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि निवेशकों को दोनों तरह के टैक्स देने होंगे।

अभी शेयरों पर शॉर्ट टर्म टैक्स लगता है। यानी एक साल से पहले अगर आप शेयर बेचते हैं तो उस पर 15 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है। एलटीसीजी टैक्स 2009 से ही लगाया जा रहा है, लेकिन पहले यूपीए सरकार और मौजूदा एनडीए सरकार इसे लागू करने से बचती रहीं। इन्हें आशंका थी कि ऐसा करने से निवेश को झटका लग सकता है।

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