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देश की बिगड़ी चुनावी तस्वीर को बदलने वाला सख्त अफसर ओल्ड ऐज होम में

नई दिल्ली। ये तो सारा देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लोग इस बात से वाकिफ हैं कि हाल ही में हुए चुनाव खासकर उप्र के विधानसभा चुनाव में विपक्ष ने चुनाव आयोग पर कई सवाल खड़े किए थे। हालांकि सवाल करने वालों कि चुनावी पारदर्शिता ने उनके मुंह पर ताले जड़ दिये। चुनाव में पारदर्शिता लाने और पूरी तरह से चुनावी सिस्टम को बदलने का श्रेय पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को जाता है।बता दें कि पिछले कुछ समय से शेषन गुमनामी की जिंदगी गुजार रहे हैं। वे आजकल ओल्ड ऐज होम में अपनी जिंदगी जी रहे हैं।

देश के जाने माने एक अखबार की रिर्पोट के मुताबिक वह चेन्नई में अपने ही घर से 50 किलोमीटर दूर ओल्ड ऐज होम में रुके थे। बताते चलें कि शेषन ही एक मात्र सख्त अफसर रहे जिन्होंने चुनावों में चरणों के आधार पर वोटिंग की शुरुआत की थी। उनका ये फैसला मील का पत्थर साबित हुआ था। हालांकि वह अभी अपने घर में रह रहे हैं लेकिन बार-बार कुछ समय के लिए ओल्ड एज होम चले जाते हैं।

श्री शेषन पिछले काफी समय से शांति का जीवन गुजार रहे हैं। बता दें कि वह सत्य साईं बाबा के भक्त रहे हैं। 2011 में उनके देह त्यागने के बाद शेषन सदमे में चले गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक उनको भूलने की बीमारी हो गई थी।तमिलनाडु काडर के IAS अधिकारी टीएन शेषन भारत के 10वें चुनाव आयुक्त बने थे। वह 12 दिसंबर, 1990 से 11 दिसंबर, 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। शेषन ने अपने कार्यकाल में स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन किया।

उन्होंने चुनाव में सुधार लाने की शुरुआत 1995 में बिहार चुनाव से की थी। बिहार में उन दिनों बूथ कैप्चरिंग का मुद्दा काफी बड़ा था। शेषन ने बिहार में कई चरणों में चुनाव कराए थे, यहां तक कि चुनाव तैयारियों को लेकर वहां कई बार चुनाव की तारीखों में बदलाव भी किया था।बिहार में बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए सेंट्रल पुलिस फोर्स का इस्तेमाल किया था।

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