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बिचौलियों के मकड़जाल में फंस रहे अन्नदाता

जितेंन्द्र वर्मा
गोण्डा। यूं तो बिचौलियों की वजह से हर एक सरकारी या गैर सरकारी योजनाओं में पलीता लगता रहता है लेकिन इस बार बिचौलियों ने अपनी जालसाजी का जो मकड़जाल बुन रखा है उससे हमारे देश के आधार कहे जाने वाले या यूं कहें कि हमारे अन्नदाता (किसान) इस मकड़जाल में फंसते नजर आ रहे हैं।

जी हां खबर यूपी के गोंडा जिले से है जंहा इस बार बनिया बने बिचौलियों ने सरकारी धान क्रय केंद्र पर जो मकड़जाल बुना है उससे किसान का मुनाफा तो दूर वे अपना मूलधन भी नहीं निकाल पा रहे हैं ये बात खुद किसान कह रहे हैं। सरकारी धान खरीद केंद्र पर धान खरीद शुरू हो चुकी है।

बता दें कि एक नवम्बर से सरकारी केंद्रों पर धान खरीदा जा रहा है।इसी के तहत गोण्डा में भी गल्ला मंडी के सरकारी केंद्र पर किसानों से धान खरीदा जा रहा है लेकिन यहां धान खरीद बहुत ही सुस्त तरीके से की जा रही है, लगभग एक महीना होने जा रहा लेकिन धान खरीद की रफ्तार इतनी धीमी है कि अब तक 52 किसानों से सिर्फ 1800 कुन्तल तक ही धान खरीदा जा सका है।

सरकारी केंद्रों पर धान सरकार द्वारा तय की गई एमएसपी रेट 1550 रुपये में खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद ही हम सरकारी केंद्रों पर अपना धान बेंच सकते हैं जिसके बारे में हमें जानकारी नहीं है। इसका फायदा हम किसानों से बिचौलिये उठाते हैं वे हम किसानों से 900 से 1000 रुपये प्रति कुन्तल के हिसाब से धान खरीद कर 1550 रुपये में सरकारी केंद्रों पर बेंच देते हैं।

वहीं दूसरी ओर धान खरीद इंस्पेक्टर का कहना है कि ऐसी कोई बात नही है केंद पर धान खरीदा जा रहा और ऑनलाइन जैसी कोई समस्या नहीं है किसान धान लेकर आते हैं लेकिन आवक ज्यादा होने के कारण किसान ये सोचते है कि हम लेकर आयें और तुरंत धान खरीद लिया जाए जो नहीं हो पाता और वे धान लेकर वापस चले जाते हैं।

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