Don't Miss
Home » विशेष » समाजवादियों के गढ़ में होती है रावण की पूजा

समाजवादियों के गढ़ में होती है रावण की पूजा

संजना

इटावा। जहां भारत में ही नहीं बल्कि कई और मुल्कों में मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम की कसमें ही नहीं खायी जाती हैं बल्कि उनकी पूजा अर्चना करने के साथ साथ उनके चरित्र पर आधारित रामायण में दर्शाये गये उनके अलावा ​अन्य पात्रों को लेकर एक जमाने से रामलीला का आयोजन होता चला आ रहा है।  वहीं इसी रामायण के सबसे क्रूर पात्रों में से एक लंका नरेश कहलाने वाले राक्षस कुल के महाबलशाली रावण के बारे में तरह तरह की बातें और कहानियां प्रचलित हैं।

आम तौर पर उससे लोग घृणा करते हैं। दशहरे में लोग उसे बुराइयों के प्रतीक स्वरूप उसके पुतले को दहन करते हैं।ऐसा माना जाता है कि रावण बुराइयों से पटा पड़ा था इसलिये उसे जलाकर एक प्रकार से बुराईयों अंत कर दिया जाता है।लेकिन इन सब बातों और कहानियों से इतर उत्तर प्रदेश के समाजवादियों का गढ़ माने जाने वाले इटावा जिले के जसवंतनगर में रावण की न केवल पूजा की जाती है बल्कि शहर भर में रावण की बड़ी श्रद्धापूर्वक आरती भी उतारी जाती है।

इतना ही नहीं यहां रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता बल्कि लोग पुतले की लकड़ियों को अपने घरों में ले जाकर इनको बड़ी श्रद्धापूर्वक संभाल कर रखते हैं यहां के लोगों का मानना है इन लकड़ियों के रखने से वे विभिन्न संकटों से दूर रहते हैं। बता दें कि यहां लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुरानी रामलीला अपने अनोखे मंचन के लिए मशहूर है। यहां इस रामलीला का आयोजन दक्षिण भारतीय तर्ज पर खुले मैदान में किया जाता है।लोग बड़े उत्साह से इसे देखने आते हैं।

About namste

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*