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बेटियों से हार गयी सरकार

रेवाड़ी। अाखिरकार स्‍कूली छात्राओं के अागे हरियाणा सरकार काे झुकना ही पड़ा। भीषण गर्मी में एक सप्‍ताह से अधिक समय से अनशन कर रहीं रेवाड़ी जिले के गोठड़ा स्कूल की 80 छात्राओं की जीत हुई है।  अब हरियाणा सरकार ने उनकी मांग काे मान लिया है और स्‍कूल को अपग्रेड करने की घोषणा की है। हरियाणा सरकार ने इसके बारे में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इस हाई स्‍कूल को शैक्षणिक सत्र 2017-18  से ही सीनियर सेकेंडरी तक क्रमोन्नत कर दिया गया है। इसक बाद छात्राओं ने अपना अनशन तोड़ दिया। अभिभावकों ने उनको जूस पिलाकर उनका अनशन खत्‍म कराया। स्‍कूल को अपग्रेड कर सीनियर सेकेंडरी तक करने जानकारी मिलने के बाद छात्राओं और अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई। क्षेत्र के लाेगों ने कहा कि बेटियों का संघर्ष रंग लाया। हमें उन पर गर्व है। जानकारी के मुताबिक ये छात्राएं स्कूल छात्राओं की भूख हड़ताल को एक हफ्ते से ज्यादा हो गया लेकिन उनकी मांग सरकार मानने को तैयार नहीं थी। भीषण गर्मी के बीच अनशन कर रहीं छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। बुधवार को तीन छात्राओं को अस्पताल ले जाना पड़ा। अब तक 10 छात्राओं की तबीयत बिगड़ चुकी है। दूसरी तरफ, हरियाणा के शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने छात्राओं के इस आंदोलन को राजनीति से प्रेरित करार देते रहे। मंत्री का कहना था कि स्कूल अपग्रेडेशन एक प्रक्रिया के तहत होगा। लेकिन जब छात्राओं की आलत बिगड़ने लगी ताे मनोहर सरकार के होश उड़ गए अौर सरकार ने अानन-फानन में स्‍कूल का दर्जा बढ़ाने का एलान कर दिया। इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया। हरियाणा के शिक्षामंत्री रमाबिलास शर्मा ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्‍होंने कहा, हमने स्‍कूल का दर्जा बढ़ा दिया है। रेवाड़ी के खोल ब्लॉक के गांव गोठड़ा टप्पा डहीना की 80 से अधिक लड़कियां बीते एक हफ्ते से अनशन पर थीं। उनकी मांग है कि गांव के 10वीं तक के स्कूल का दर्जा बढ़ा कर सीनियर सेकेंडरी किया जाए जिससे कि वहां 12वीं तक पढ़ाई हो सके। उनका कहना था कि लड़कियों को 10वीं से आगे की पढ़ाई के लिए कनवली स्थित स्कूल जाना पड़ता है। यह स्कूल उनके गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर है। छात्राओं के मुताबिक उन्हें रोज स्कूल आने-जाने में छेड़खानी का शिकार होना पड़ता है। गांव के सरपंच सुरेश चौहान का कहना है कि छेड़छाड़ करने वाले शोहदे किस्म के लड़के इतने शातिर हैं कि हेलमेट पहने रखते हैं, जिससे कि उनकी पहचान ना हो सके। लड़कियों ने अपनी परेशानी घरवालों के साथ ही सरपंच को भी बताई। घरवालों ने तो लड़कियों को यहां तक कह दिया कि स्कूल छोड़ दो। वहीं सरपंच ने मामले को स्थानीय अधिकारियों के सामने उठाया लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार इन लड़कियों ने खुद ही मोर्चा संभालते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।

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