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15 लाख के इनामी नक्सली का आत्मसमर्पण

 

राची। झारखंड में डेढ़ दशक से आतंक का पर्याय रहे कुंदन पाहन ने रविवार को रांंची में एडीजी (ऑपरेशंस) के सामने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गया। कुंदन न सिर्फ दुर्दांत नक्सली के रूप में चर्चित रहा है, बल्कि झारखंड में नक्सली संगठन के विस्तार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
करीब सवा सौ से अधिक मामलों मेें वांंछित कुंदन केे आत्मसमर्पण से झारखंड पुलिस ने न सिर्फ राहत की सांस ली है, बल्कि नक्सलियों के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देख रही है।

कुंदन पूर्व मंत्री और तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा की 2008 में हत्या करने, पुलिस निरीक्षक फ्रांसिस इंदुवर का सिर कलम करने और आईसीआईसीआई बैंक की कैश वैन से पांच करोड़ रुपए लूटने जैसी वारदातों में शामिल था।

15 लाख का इनामी और एमसीसीआई (माओवादी) के झारखंड क्षेत्रीय कमेटी के पूर्व सचिव कुंदन ने सरकार की आत्मसमर्पण नीति ‘नई दिशा’ के तहत सरेंडर किया है।
एडीजी राज कुमार मल्लिक ने नक्सली कुंदन पाहन को इस सरेंडर पॉलिसी के तहत 15 लाख रुपए का चेक सौंपा।

कुंदन 16 वर्ष की आयु में 1999 में नक्सली आंदोलन से जुड़ा। वह 2006 में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की क्षेत्रीय समिति का सदस्य बना और 2012 में समिति का सचिव बन गया। कुंदन के दो बड़े भाई भी नक्सली हैं। जिनमें से एक ने समर्पण कर दिया, जबकि दूसरे को गिरफ्तार कर लिया गया है।

कुंदन पर राजधानी रांची समेत प्रदेश के कई जिलों में सवा सौ से अधिक मामले दर्ज हैं।

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