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कश्मीर के लिये क्या चाहती है भारतीय सेना

नई दिल्ली। कश्मीर में सेना गर्मियों के दौरान आतंकी वारदातों में भारी इजाफे का सामना कर रही है ऐसे में जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
एक अंग्रेजी समाचार पत्र के अनुसार सेना ने केंद्र सरकार को संकेत दिए हैं कि वो राज्य में राज्यपाल शासन के हक में है।इस रिपोर्ट के मुताबिक सेना का मानना है कि राज्यपाल शासन दक्षिणी कश्मीर में उसे आतंकियों से निपटने में मदद करेगा। ये इलाका पीडीपी का गढ़ रहा है।
लेकिन पिछले साल बुरहान वानी की मौत के बाद यहां हालात बिगड़े हैं। पिछले दिनों दक्षिण कश्मीर में बैंकों को लूटने की कई वारदातें हुई हैं। कई बार पुलिस के हथियार छीने गए हैं। यहां के जंगलों और बगीचों में आतंकी झुंडों के कई वीडियो और फोटो सोशल मीडिया में आ चुके हैं। खुफिया सूत्रों का मानना है कि पिछले एक साल में दक्षिणी कश्मीर के सैकड़ों नौजवानों ने हथियार थामे हैं।
ऐसे में कड़ी कार्रवाई वक्त की मांग है और ये राज्यपाल शासन में ही मुमकिन है।
सेना का मानना है कि हालात पर काबू पाने के लिए कुछ गिरफ्तार अलगाववादियों को कश्मीर वादी से बाहर की जेलों में भेजने की जरूरत है।
एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक ‘सेना की राय में पीडीपी और बीजेपी के बीच गठजोड़ घाटी में गुस्से की बड़ी वजह है। अगर राज्यपाल का शासन लगता है तो कम से कम इस पहलू का निदान हो जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक महबूबा मुफ्ती सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता और लोक निर्माण मंत्री नईम अख्तर राज्यपाल शासन की किसी भी योजना की जानकारी से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली जब चाहे राज्यपाल शासन लागू करने के लिए स्वतंत्र है।
हालांकि अख्तर ये भी मानते हैं कि इस कदम से हालात सुधारने में मदद नहीं मिलेगी।उनके मुताबिक ‘इस समस्या का सिर्फ सैन्य समाधान नहीं हो सकता क्योंकि हम यहां लोगों की बात कर रहे हैं।
घाटी में स्थिति सिर्फ संवेदनात्मक रवैये से ही सुधरेगी और सत्ताधारी गठबंधन का यही मानना है।’ अख्तर ने माना कि आतंकियों के साथ सख्ती से ही निपटा जा सकता है। लेकिन असल चुनौती इस काम में लोगों का सहयोग हासिल करने की है।जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान है।

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